मूल्यह्रास ( Depreciation ) क्या है ? Depreciation Meaning In Hindi
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हेल्लो फ्रेंड्स स्वागत आपका हमारी एक और नई पोस्ट के साथ ! दोस्तों जो व्यक्ति एकाउंटिंग फील्ड से है या फिर एकाउंटिंग का कार्य करते है वे मूल्यह्रास ( Depreciation ) के बारे में थोडा बहुत जरुर जानते होंगे ! यदि आप मूल्यह्रास क्या है ? ( What Is Depreciation ) . मूल्यह्रास लगाने का कारण क्या है ? ( Causes of Depreciation ) . तथा मूल्यह्रास लगाने की विधियाँ कोनसी है ? इन सभी बातो को इस लेख में विस्तार से जानेंगे ! तो आइये शुरू करते है Depreciation Meaning In Hindi
मूल्यह्रास क्या है ? (What Is Depreciation In Hindi )
किसी सम्पति के पुस्तकीय मूल्य में किसी कारणवश धीरे – धीरे होने वाली कमी को मूल्यह्रास (Depreciation ) कहते है !
सामान्य शब्दों में हम कह सकते है व्यवसाय में प्रयोग होने वाली किसी सम्पति की Value में धीरे – धीरे होने वाली कमी को मूल्यह्रास कहते है !
मूल्यह्रास के कारण (Causes of Depreciation In Hindi )
किसी assets पर ह्रास लगाने के निम्न कारण हो सकते है –
- किसी व्यापार या बिजनेस में प्रयोग होने वाली सम्पति चाहे वह चल हो या अचल लगातार उनका प्रयोग करने से उनमे टूट – फुट और घिसावट आ जाती है जिसके चलते वह पुरानी और कम उपयोगी हो जाती है जिसके चलते उस पर डेप्रिसिएशन लगाया जाता है !
- समय व्यतीत हो जाने के कारण सम्पति कम उपयोगी हो जाती है !
- किसी नये आविष्कार के कारण कोई सम्पति पुरानी और अप्रचलित हो जाती है !
- बाजार मूल्य में कमी होना !
ह्रास लगाने का उद्देश्य क्या है ? (What is the purpose of depreciation )
किसी वस्तु या सम्पति पर ह्रास लगाने का उद्देश्य निम्न है –
- किसी सम्पति में लगाया गया ह्रास उसके मूल्य में कमी को दर्शाता है अर्थार्त इसे हम खर्चा कह सकते है जिसे profit & loss खाते में खर्चे के रूप में दिखाया जाता है !
- व्यवसाय में सही वितीय स्थिति जानने के लिए यह जरुरी होता है कि उसकी assets को balance sheet में उसके वास्तविक मूल्य पर दिखाया जाए !
- व्यवसाय में सही उत्पादन लागत ज्ञात करने हेतु सम्पति पर ह्रास लगाना आवश्यक है !
- ह्रास लगाने से एक दिन उस सम्पति का मूल्य शून्य रह जाता है जिससे हमें यह पता चलता है कि अब नई सम्पति को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है !
मूल्यह्रास की गणना के नियम (Rules for calculating depreciation )
जब भी हम मूल्यह्रास की गणना करते है तो उसकी गणना करने के कुछ नियम और शर्ते निर्धारित की गई है जो निम्न है –
- व्यवसाय में किसी सम्पति को यदि किसी महीने के बिच में ख़रीदा गया है तो उसकी ह्रास की गणना अगले माह की 1 तारीख से वितीय वर्ष की समाप्ति तक की जाती है ! मान लीजिये आपने कोई मशीन 20 मई को क्रय की है तो उस सम्पति पर ह्रास की गणना 1 जून से लेकर 31 मार्च तक 10 महीने के लिए की जाएगी !
- यदि कोई सम्पति वर्ष के प्रारंभ से लेकर वर्ष के अंत तक विद्यमान रही है तो उस पर पुरे 1 वर्ष के लिए मूल्यह्रास लगाया जायेगा !
- यदि किसी सम्पति को बेच दिया जाता है तो विक्रय की गई तिथि तक का ह्रास लगाया जायेगा !
- किसी सम्पति के सम्बन्ध में उसकी क्रय की तिथि नहीं दी गई हो और उसकी ह्रास की दर प्रतिवर्ष के रूप में दी गई हो तो उस पर ह्रास की गणना निम्न में से किसी भी विधि से की जा सकती है –
- अतिरिक्त सम्पति पर ह्रास की गणना न की जाए !
- अतिरिक्त लगाई गई सम्पति पर पुरे एक वर्ष का ह्रास लगाया जाए !
- अतिरिक्त लगाई गई सम्पति पर माह के हिसाब से ह्रास लगाया जाए !
मूल्य ह्रास लगाने की विधियां ( Methods of Depreciation )
मूल्य ह्रास लगाने की अनेक विधियाँ दी गई है उनमे से हम किसी भी विधि का प्रयोग करके किसी सम्पति पर ह्रास चार्ज कर सकते है ! मूल्यह्रास की कुछ विधियां जो अधिकतर उपयोग ली जाती है वे निम्न है –
- वार्षिक पद्दति ( Annuity Method )
- सरल रेखा पद्दति ( Straight Line Method )
- घटते हुए मूल्य पद्दति ( Written Down Value Method )
- ह्रास कोष पद्दति ( Depreciation Policy Method )
- बिमा पालिसी पद्दति ( Insurance Policy Method )
- पुनर्मूल्यांकन पद्दति ( Revaluation Method )
- कार्य करने की इकाई पद्दति ( Depletion Unit Method )
- मशीन घंटा पद्दति ( Machine Hour Method )
- समूह ह्रास विधि ( Group Depreciation Method )
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