गिफ्ट निफ्टी में अचानक गिरावट! ट्रंप के 25% टैरिफ ने मचाया तूफान, निवेशकों में मची खलबली
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Gift Nifty Crash : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला ऐलान करते हुए भारत पर 25% आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की बात कही है। इसके बाद गिफ्ट निफ्टी में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। ट्रंप के इस बयान के बाद बाजार में 174 अंकों की गिरावट देखी गई और गिफ्ट निफ्टी 24,860 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर लिखा —
“भारत को 1 अगस्त से 25% टैरिफ और अतिरिक्त जुर्माना चुकाना होगा।”
ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों और रूस के साथ उसके करीबी रिश्तों पर भी तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारत की टैरिफ नीति ऐतिहासिक रूप से “अनुचित” रही है।
भारत पर टैरिफ लगाने के पीछे ट्रंप का मकसद क्या है?
ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक समझौते ठीक चल रहे हैं, लेकिन भारत की नीति “सुधार” की मांग करती है। ट्रंप का यह भी कहना है कि अमेरिका के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।
गिफ्ट निफ्टी में गिरावट का कारण क्या है?
गिफ्ट निफ्टी, जो भारत के शेयर बाजार का संकेतक है, ट्रंप के ऐलान के तुरंत बाद लगभग 0.70% गिर गया। निवेशकों में डर है कि यह टैरिफ भारत के कुछ प्रमुख एक्सपोर्ट सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल, ऑटो, और फार्मा पर सीधा असर डाल सकता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स की राय क्या है?
📌 प्रकाश दीवान (मार्केट एक्सपर्ट)
“बाजार अभी सीमित दायरे में है, लेकिन यह ट्रंप का बयान शॉर्ट टर्म में एक बड़ा ट्रिगर बन सकता है। अगर आगे जाकर टैरिफ में कोई राहत मिलती है तो यह बाजार के लिए एक पॉजिटिव सिग्नल होगा।”
📌 सुनील सुब्रमण्यम (फाइनेंशियल एक्सपर्ट)
“भारत का एक्सपोर्ट सेक्टर अब मजबूत हो चुका है। कई देशों के मुकाबले हम पहले ही ज्यादा टैरिफ झेलते आए हैं। इस मुद्दे पर आगे बातचीत संभव है जिससे राहत मिल सकती है।”
📌 नीलेश शाह (कोटक महिंद्रा AMC)
“अमेरिका की नीतियों में स्थिरता की कमी है, लेकिन भारत को अब इस चुनौती को अवसर में बदलना होगा। यह जरूरी है कि भारत ‘TACO’ (Trade Agreement for Competitive Opportunity) जैसा समझौता करे, ताकि अमेरिकी मार्केट तक बिना रुकावट एक्सेस मिल सके।”
अब आगे क्या हो सकता है? कल शेयर बाजार की चाल कैसी होगी?
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अगर सरकार इस मुद्दे पर त्वरित प्रतिक्रिया देती है तो बाजार में राहत देखने को मिल सकती है।
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विदेशी निवेशक (FIIs) इस घटनाक्रम को लेकर सतर्क हो सकते हैं।
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छोटे और मिडकैप स्टॉक्स में अस्थिरता बनी रह सकती है।
🟢 निष्कर्ष: निवेशकों को क्या करना चाहिए?
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फिलहाल panic selling से बचें।
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न्यूज फ्लो और सरकारी प्रतिक्रिया पर नजर रखें।
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लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं — यह अस्थिरता जल्द स्थिर हो सकती है।
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